सरसों तथा मूंगफली का तेल द्रव रूप में ही क्यों रहते हैं ?


सरसों तथा मूंगफली का तेल द्रव रूप में ही क्यों रहते हैं ?

👉 वसा दो प्रकार की होती हैं-संतृप्त और असंतृप्त । सरसों तथा मूंगफली के तेल असंतृप्त वसा से निर्मित हैं। असंतृप्त वसा में वसा अम्लों के अणुओं में एक या अधिक द्वि-आबंध होते हैं । इन वसाओं का द्रवणांक बहुत कम होता है, अत: ये तरल अवस्था में ही पाए जाते हैं। इसके विपरीत ताजे मक्खन में द्वि-आबंध नहीं होते, जिससे वह ठोस अवस्था में रहता है क्योंकि वह संतृप्त वसा है। आयु बढ़ने के साथ-साथ बहुत से व्यक्ति मोटे क्यों हो जाते हैं?

आयु बढ़ने के साथ-साथ मनुष्य की ऊर्जा व्यय करने की क्षमता भी कम हो जाती है।

👉 इस अवस्था में शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भोजन की थोडी मात्रा की ही आवश्यकता होती है। यदि मनुष्य पहले की तरह ही भोजन लेता रहे, तो फालतू भोजन वसा में बदल जाता है जो शरीर में इकट्ठा होता रहता है। इस कारण, ऐसे व्यक्ति मोटे हो जाते हैं।

फ्लोराइड से दांत मजबूत क्यों होते हैं?

👉 प्रत्येक मनुष्य के जीवन काल में दांत दो बार निकलते हैं । जन्म के कुछ महीनों बाद निकलने वाले दांत नौ दस साल की उम्र में गिर जाते हैं। इन्हें दूध के दांत कहते हैं। इनके स्थान पर नए स्थायी दांत आ जाते हैं। दूध के दांतों की संख्या बीस होती है। स्थायी दांतों की संख्या बत्तीस होती है। प्रत्येक दांत में मसूड़ों से ऊपर क्राउन नामक हिस्सा होता है और प्रत्येक दांत की एक से लेकर तीन तक जड़ें होती हैं, जो उसके आकार-प्रकार और स्थिति पर निर्भर करती हैं। दांत का अधिकांश भाग पीले रंग के एक सख्त पदार्थ से बना होता है, जिसे डेंटाइन कहते हैं। दांत के क्राउन भाग पर एक सफेद रंग के पदार्थ की परत चढ़ी रहती है, जिसे इनेमल कहते हैं। यह मानव शरीर का सबसे सख्त ऊतक है। फ्लोराइड एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो दांतों के इनेमल को और भी मजबूत बनाता है। जब हम अपने दांतों को फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करते हैं तो फ्लोराइड के अणु दांतों पर चिपक जाते हैं। चूंकि फ्लोराइड अणु दांत की ऊपरी संरचना में अधिक उपयुक्त रूप से फिट हो जाते हैं, वे दांतों की ऊपरी परत को और भी मजबूत बना देते हैं।

पैन्क्रिआस शरीर के लिए जरूरी क्यों होती है ?

👉 पैन्क्रिआस मानव शरीर सहित सभी रीढ़ की हड्डी वाले प्राणियों का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। यह पेट के निचले भाग में स्थित होता है और पार्श्व से लेटे पलास्क जैसा दिखता है। इस ग्रंथि का रंग गुलाबीपन लिए पीला होता है और यह 12 से 15 सेमी लंबी, 3.8 सेमी चौड़ी और 2.5 सेमी मोटी होती है। आइए जानें यह शरीर के लिए महत्वपूर्ण क्यों होती है। पैन्क्रिआस एक बहुत ही शक्तिशाली पाचक रस पैदा करता है। यह रस ही आंतों में भोजन को तोड़ता है। इससे इंसुलिन और ग्लूकेगोन नामक हार्मोन भी पैदा होते हैं। यह ग्रंथि रोज करीब सवा किलो से डेढ़ किलो पैन्क्रिऑटिक रस पैदा करती है। सोडियम बाइकार्बोनेट युक्त यह रस अम्ल को उदासीन कर एक नली से होता हुआ छोटी आंत या डुओडिनम तक आता है। इस रस में लवण और एंजाइम होते हैं, जो प्रोटीन, स्टार्च, शर्करा और वसा को पचाने में सहायता करते हैं। इस रस में पांच एंजाइम होते हैं, जो प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को पचाने का काम करते हैं। अगर पैन्क्रिआस ग्रंथि नहीं हो, तो न तो भोजन ठीक से पच सकता है और न ही इंसुलिन के अभाव के कारण रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है।

आंसू क्यों निकलते हैं?

जब किसी शोक-समाचार या दुख के कारण हम रोने लगते हैं तो हमारी आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। रोने का कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन इस क्रिया में सदा ही हमारी आंखों से आंसू निकलते हैं। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है ? हमारी आंखों की पलकें सदा ही खुलती और बंद होती रहती हैं। पलकों का यह खुलना और बंद होना मांसपेशियों द्वारा होता है। इनकी गति इतनी तीव्र होती है कि पलक झपकने से हमारी दृष्टि पर कोई असर नहीं पड़ता। पलक झपकने की क्रिया हर छः सेकंड के अंतर में सारी उम्र होती है। हमारी आंख के बाहरी कोने के अंदर एक आंसू ग्रंथि होती है। इस ग्रंथि से पतली नलियां आंसुओं को ऊपर की पलक तक ले जाती हैं और वहां से दूसरी पतली नलियों द्वारा आंसू आंखों से बाहर आ जाते हैं। जब भी हम पलक झपकते हैं, वैसे ही आंसू नलिकाओं से कुछ तरल पदार्थ बाहर आ जाता है। यही तरल पदार्थ आंखों को नम रखता है और
सूखने से बचाता है।

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