एक पेड़ से दूसरे प्रकार के फल कैसे प्राप्त होते हैं?


एक पेड़ से दूसरे प्रकार के फल कैसे प्राप्त होते हैं?

कई पेड़ कलम लगने की सरल प्रणाली से दूसरी किस्म के फल पैदा कर सकते हैं। कलम लगाना एक ऐसी तकनीक है, जिसमें एक पौधे के भाग को दूसरे से जोड़ा जाता है। यदि नाशपाती के पेड़ की किसी टहनी से तोड़ी गई कली को बिही की झाड़ी की छाल में छेद करके सावधानी से प्रवेश करा
दिया जाए तो एक नाशपाती की डाली उग जाएगी। तब बिही की झाड़ी में नाशपातियां भी पैदा होंगी तथा बिही के फल भी। कलम लगाने की तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि दूसरा प्रयोग किसी विशेष उत्पाद की किस्म बेहतर करने के लिए किया जा सकता है। किसी कीलदार टहनी अथवा
कलम को दूसरे पौधों में लगाने के लिए दो नियमों का पालन आवश्यक होता है-पहला, केवल आपस में संबंधित पेड़ों अथवा झाड़ियों की जातियों की ही कलमें लगाई जा सकती हैं। अर्थात सेब की कलम नाशपाती व बिही के पेड़ों पर लगाई जा सकती है तथा आड़ की कलम खूबानी, आलूबुखारा, बादाम तथा गुठली वाले अन्य फलों के पेड़ों पर लगाई जा सकती है

लोहे पर जंग क्यों लगता है?

👉 लोहे की चीजों को किसी नमी वाले स्थान पर कुछ दिन रख दिया जाए तो इन चीजों पर कत्थई रंग की एक परत सी जम जाती है, इसी को जंग लगना कहते हैं । जंग वास्तव में लोहे का ऑक्साइड है। जब लोहे के परमाणु ऑक्सीजन से मिलते यानी संयोग करते हैं, तो लोहे का ऑक्साइड बनता है।
लोहे के परमाणुओं का ऑक्सीजन से मिलना ऑक्सीकरण की क्रिया कहलाती है। लोहे पर जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और नमी का होना अत्यंत आवश्यक है। नमी और ऑक्सीजन की उपस्थिति में लोहे के परमाणु धीरे- धीरे ऑक्सीजन से मिलकर लोहे का ऑक्साइड बनाते रहते हैं और जंग लगने की क्रिया जारी रहती है। जंग लगने से ठोस लोहे की सतह झड़ने लगती है और कमजोर पड़ जाती है। जंग लगने को रोकना वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या रही है। लोहे पर जंग लगने को पेंट या प्लास्टिक की पतली परत चढ़ाकर कुछ हद तक रोका जा सकता है। पेंट या प्लास्टिक की
पतली परत के कारण लोहे के परमाणु पानी के संपर्क में नहीं आ पाते इसलिए ऑक्सीजन लोहे के साथ संयोग नहीं कर पाती और जंग नहीं लगता।

केले को उपयोगी क्यों माना जाता है?

👉 केले के लिए कहा जाता है कि यह स्वास्थ्य के लिए एक बहुत ही उपयोगी फल है। केले की लगभग 2 सौ किस्में हैं और इसका पौधा 609.60 सेमी से 914.4 सेमी तक बढ़ता है। यह उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में पैदा होता है। सबसे पहले केले का पौधा दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडोनेशिया के
जंगलों से प्राप्त हुआ था। गरम प्रदेशों में केले के पौधे खूब उगाए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि स्वास्थ्य के लिए केला उपयोगी क्यों है ? विशेषज्ञों के मुताबिक केला शरीर की गरमी को दूर करता है। केले के गूदे में 74 फीसदी पानी, 20 फीसदी चीनी, 2 फीसदी प्रोटीन, 1.5 फीसदी वसा, 1 फीसदी सेल्यूलोज और शेष विटामिन होते हैं। विटामिनों में मुख्य रूप से ए.बी. और सी. होते हैं। इन सभी पदार्थों के कारण केला हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी है। प्राकृतिक चिकित्सा में कुछ रोगों में मरीज को केला खाने के लिए दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार केले में उपस्थित चीनी शरीर में शर्करा की मात्रा को संतुलित करती है। सूखे केले से बनाया गया आटा डायबिटीज के रोगियों के लिए, जबकि केले के तने का सेवन रक्त शर्करा के मरीजों के लिए लाभदायक है।

केवल नर या मादा ही क्यों नहीं पैदा होते?

👉 जन्म और मृत्यु प्रकृति का नियम है और संतान पैदा करना हर जीवित प्राणी का गुण है। क्या आप जानते हैं कि मानव की संतान में सभी बच्चे केवल नर या केवल मादा ही क्यों नहीं पैदा होते? महिलाओं में मासिक धर्म शुरू होने के बाद संतान पैदा करने की क्षमता पैदा हो जाती है। महिला के
अंडे और पुरुष के शुक्राणु के संयोग से ही गर्भ में बच्चे की निर्माण क्रिया होती है। स्त्री में पैदा होने वाले अंडे और पुरुष के वीर्य में उपस्थित शुक्राणुओं में सेक्स क्रोमोसोम होते हैं। स्त्री के सभी अंडों में केवल एक ही प्रकार के सेक्स क्रोमोसोम होते हैं। जिन्हें एक्स क्रोमोसोम कहते हैं। पुरुष के शुक्राणुओं को एक्स और वाई क्रोमोसोम कहते हैं। एक्स क्रोमोसोम का आकार वाई क्रोमोसोम से कुछ बड़ा होता है। गर्भाधान की क्रिया में जब पुरुष का एक्स क्रोमोसोम महिला के अंडे में प्रवेश कर जाता है तो इसके मिलने से लड़की का निर्माण होता है। यदि पुरुष का वाई क्रोमोसोम महिला के अंडे में प्रवेश कर जाता है तो लड़के का निर्माण होता है। बच्चे का नर या मादा बनना केवल पुरुष के ही द्वारा नियंत्रित होता है।

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