क्यों साथ-साथ चलता है चंद्रमा?


क्यों साथ-साथ चलता है चंद्रमा?

रात के समय ट्रेन की खुली खिड़की से बाहर देखना बहुत अच्छा लगता है। नदियां, पहाड़, पेड़ और शहर पीछे छूटते जाते है, लेकिन चंद्रमा साथ ही चलता रहता है। आइए, देखें कि चंद्रमा क्यों साथ चलता है ? जब हम किसी भी चीज को देखते हैं, तो वह हमारी आंखों पर एक कोण बनाती है। यदि उस वस्तु की स्थिति बदल दी जाए, तो उसके कारण आंखों पर बनने वाला कोण भी बदल जाता है। जब हम ट्रेन या किसी अन्य वाहन से जा रहे हों, तो नदियां, मकान, पहाड़ और झाड़-पेड़ पीछे जाते हुए नजर आते हैं, क्योंकि ट्रेन या उस वाहन के आगे बढ़ने से दृश्य द्वारा आंखों पर बनाया जाने वाला कोण बदल जाता है। लेकिन जो चीजें पीछे जाती हुई नजर आती हैं, उनसे हमारी दूरी अधिक नहीं होती, इसलिए स्थिति में जरा से बदलाव से भी कोण बदल जाता है। जबकि चंद्रमा पृथ्वी से 3 लाख 84 हजार किमी. की दूरी पर है। इतनी अधिक दूरी होने के कारण जब हम आगे बढ़ते भी हैं, तो
चंद्रमा के कारण आंखों पर बनने वाले कोण में कोई बदलाव नहीं आता। यही वजह है चंद्रमा हमें साथ चलता हुआ दिखाई देता है

बच्चे क्यों दिखते हैं माता या पिता जैसे?

👉 अक्सर बच्चों का रूप-रंग, उनकी कद-काठी माता या पिता में से किसी एक की तरह होती है। आइए देखें, ऐसा क्यों होता है? मनुष्य के शारीरिक गुण-सूत्र एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी क्रोमोसोम्स के द्वारा हस्तांतरित होते हैं। बच्चे के जन्म के लिए 46 क्रोमोसोम्स जरूरी होते हैं, जिनमें से 23 पिता के द्वारा और 23 माता के द्वारा प्राप्त होते हैं। इसका मतलब यह है कि जन्म लेने वाले बच्चे के पास हर जीन के दो संस्करण होते हैं, एक पिता से प्रदत्त और एक माता का दिया हुआ। जीन क्रोमोसोम्स का छोटा सेक्शन होती है। हर जीन में बच्चे में विशेष गुण के विकास के लिए जरूरी सूचनाएं दर्ज होती हैं। मसलन, कोई जीन आंखों के रंग के लिए जिम्मेदार है, तो कोई बालों के रंग के लिए। बच्चे में उसी जीन के गुण आते हैं, जो प्रभुत्वशाली होता है। उदाहरण के लिए पिता के बालों का रंग काला है और माता के बाल भूरे हैं। अगर बालों के रंग का निर्धारण करने वाले जीनों में माता के जीन का प्रभुत्व है, तो बच्चे के बालों का रंग भी माता के बालों के रंग की तरह ही होगा। इसके विपरीत यदि पिता की जीन अधिक प्रभुत्वशाली है, तो बच्चे के बालों का रंग पिता के बालों की तरह होगा।

काटने वाले कीड़े शरीर में कीटाणु कैसे भेजते हैं?

👉 पृथ्वी पर रहने वाले हजारों प्रकार के कीड़ों में से कुछ काटने वाले कीड़े हमारे बहुत बड़े दुश्मन हैं। काटकर रोग फैलाने वाले कीड़ों में मुख्य रूप से मच्छर, ट्सेट्से मक्खी, जुएं, रैट फ्लाई, खटमल आदि ऐसे हैं जो अनेक बीमारियां फैलाते हैं। ये कीड़े जब किसी रोगी को काटते हैं और उसका खून
चूसते हैं तो रोगी से बीमारी के कीटाणु उनके शरीर में आ जाते हैं। यही कीड़ा जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो अपनी सुई जैसी खोखली नली द्वारा लार के साथ उस रोग के कीटाणु शरीर में प्रवेश करा देता है। ये कीटाणु उसके शरीर में पहुंचकर उस स्वस्थ व्यक्ति को भी रोगी बना देते हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से मलेरिया फैलता है। ट्सेट्से मक्खी के काटने से स्लीपिंग सिकनेस, जुओं के काटने से टायफाइड और रैट फ्लाई के काटने से प्लेग के कीटाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। दरअसल, ये कीटाणु स्वयं जीवित रहने के लिए हमारा खून चूसकर अपना पेट भरने हेतु
हमें काटते हैं। खून चूसने से पहले थोड़ी-सी लार हमारे शरीर के अंदर भेजते हैं ताकि खून सूखकर गाढ़ा न हो जाए और इसी लार के साथ रोग के कीटाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

छिपकली अपनी पूंछ छोड़कर क्यों भाग जाती है?

👉 छिपकली देखने में डरावनी लगती है, लेकिन यह जहरीली नहीं होती है। कभी-कभी देखा जाता है कि छिपकली अपनी पूंछ छोड़कर भाग जाती है। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है ? जब छिपकली पर उसका कोई शत्रु हमला करता है और इसकी पूंछ जरा सी भी पकड़ में आ जाती है तो यह अपनी पूंछ का वह हिस्सा छोड़कर भाग जाती है और दुश्मन के चुंगल से अपने को बचा लेती है। कटी हुई पूंछ थोड़ी देर तक छटपटाती रहती है। कुछ ही दिनों में छिपकली की नई पंछ उग आती है। छिपकली द्वारा पूंछ छोड़ने का गुण एक ऐच्छिक गुण है। इसकी पूंछ की हड्डियां दूसरी हड्डियों के साथ में ढीले रूप में जुड़ी होती हैं, इसलिए पूंछ इसके शरीर से आसानी से अलग हो सकती है। पूंछ काटने पर खून भी नहीं निकलता, क्योंकि इसकी रक्त कोशिकाओं के अंतिम सिरे लगभग बंद होते हैं। इन सब कारणों से इसे अपनी पूंछ शरीर से अलग करने में कष्ट नहीं होता और पूंछ कटने पर इसे
चलने में भी कोई परेशानी नहीं होती।

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